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  • स्वतंत्रता के बाद भारतीय राज्य का निर्माण और भारतीय रियासतों का एकीकरण

    स्वतंत्रता के बाद भारतीय राज्य का निर्माण और एकीकरण

    🔎 विषय सूची

    1. कैबिनेट मिशन योजना
    2. माउंटबेटन योजना और विभाजन
    3. ब्रिटिश प्रांत और रियासतों का प्रश्न
    4. पैरामाउंटसी का अंत और विकल्प
    5. सरदार पटेल और वी.पी. मेनन की भूमिका
    6. भारतीय राज्य निर्माण की चुनौतियाँ
    7. निष्कर्ष

    भारत ने 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त की। यह केवल औपनिवेशिक शासन से मुक्ति का क्षण नहीं था, बल्कि
    आधुनिक भारतीय राष्ट्र-राज्य की नींव डालने की कठिन यात्रा की शुरुआत थी। ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत को
    जानबूझकर राजनीतिक रूप से बिखरा हुआ छोड़ा — सीधे शासन वाले ब्रिटिश प्रांत और लगभग 565 रियासतें,
    जिन पर स्थानीय राजा-महाराजा शासन करते थे। चुनौती यह थी कि इन्हें एक एकीकृत, लोकतांत्रिक और स्थिर राष्ट्र में कैसे बदला जाए।

    1. कैबिनेट मिशन योजना (1946)

    द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन आर्थिक और राजनीतिक रूप से कमजोर हो चुका था। 1946 में उसने भारत की स्वतंत्रता की प्रक्रिया तय करने के लिए
    कैबिनेट मिशन भेजा। इसमें तीन ब्रिटिश मंत्री — लॉर्ड पैथिक लॉरेन्स, स्टैफर्ड क्रिप्स और ए.वी. अलेक्जेंडर — शामिल थे।

    मिशन ने प्रस्ताव रखा कि भारत में एक संघीय संविधान सभा बनाई जाए, जिसमें प्रांतों और रियासतों के प्रतिनिधि शामिल हों।
    योजना के अनुसार भारत तीन समूहों (A, B, C) में बंटा रहता और केंद्र के पास केवल रक्षा, विदेश नीति और संचार के विषय रहते।
    यह कांग्रेस के लिए अस्वीकार्य था क्योंकि वह मजबूत केंद्र चाहती थी। दूसरी ओर, मुस्लिम लीग को यह योजना पसंद आई क्योंकि इसमें
    पाकिस्तान की दिशा में कदम दिख रहा था। लेकिन अंततः लीग ने सीधी कार्रवाई (Direct Action) का रास्ता अपनाया और सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे।
    इस असफलता ने भारत के विभाजन की राह खोल दी।

    2. माउंटबेटन योजना और विभाजन (1947)

    भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने 3 जून 1947 को एक ऐतिहासिक योजना प्रस्तुत की। इसे माउंटबेटन योजना कहा जाता है।
    इसके तहत ब्रिटिश भारत को दो प्रभुत्वशाली डोमिनियनों — भारत और पाकिस्तान — में विभाजित किया गया।

    ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 पारित किया, जिसके अनुसार 15 अगस्त 1947 को दोनों राष्ट्र अस्तित्व में आए।
    विभाजन केवल राजनीतिक नहीं था बल्कि यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा विस्थापन भी बना — लाखों लोग मारे गए और करोड़ों विस्थापित हुए।
    यह विभाजन भारतीय राज्य निर्माण की जटिलताओं को और गहरा कर गया।

    ✔️ क्विक पॉइंट्स

    • कैबिनेट मिशन ने संघीय ढाँचे का सुझाव दिया लेकिन विफल रहा।
    • माउंटबेटन योजना से भारत और पाकिस्तान बने।
    • ब्रिटिश प्रांत स्वतः भारत/पाकिस्तान में सम्मिलित हुए।
    • 565 रियासतों को इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर करना पड़ा।
    • सरदार पटेल और वी.पी. मेनन ने रियासतों का सफल एकीकरण किया।

    Bare Text: स्वतंत्रता के बाद भारतीय राज्य निर्माण और रियासतों का एकीकरण भारतीय राष्ट्रवाद की सबसे बड़ी उपलब्धि थी।

    3. ब्रिटिश प्रांत और रियासतों का प्रश्न

    भारत के स्वतंत्र होने के समय दो तरह की राजनीतिक इकाइयाँ थीं —
    ब्रिटिश प्रांत और रियासतें। ब्रिटिश प्रांत सीधे इंग्लैंड के शासन के अधीन थे और स्वतः
    भारत या पाकिस्तान का हिस्सा बन गए। लेकिन सबसे कठिन चुनौती थी — रियासतों का भविष्य

    लगभग 565 रियासतें थीं, जो भारतीय भूभाग के एक-तिहाई हिस्से और आबादी के 25% हिस्से को नियंत्रित करती थीं।
    इनका प्रश्न यह था कि क्या वे स्वतंत्र रहेंगी, भारत/पाकिस्तान में शामिल होंगी या अपनी अलग संप्रभुता बनाएंगी?

    4. पैरामाउंटसी का अंत और विकल्प

    ब्रिटिश शासन के समय रियासतें पैरामाउंटसी (Paramountcy) के अधीन थीं, यानी उनकी रक्षा, विदेश नीति
    और संचार पर अंग्रेजों का नियंत्रण था। स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के बाद यह पैरामाउंटसी समाप्त हो गई और रियासतों
    को तीन विकल्प दिए गए:

    • भारत में विलय
    • पाकिस्तान में विलय
    • स्वतंत्र रहना

    यह स्थिति खतरनाक थी क्योंकि अगर रियासतें स्वतंत्र रहतीं तो भारत एक राजनीतिक “चेकर्ड बोर्ड”
    में बदल जाता और उसकी एकता असंभव हो जाती।

    5. सरदार पटेल और वी.पी. मेनन की भूमिका

    भारत की एकता का सबसे बड़ा श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल को जाता है। उन्हें “भारत का लौह पुरुष” कहा गया क्योंकि
    उन्होंने दृढ़ता और व्यावहारिकता से रियासतों को भारत में मिलाया। उनके साथ वी.पी. मेनन (भारत सरकार के सचिव) थे,
    जिन्होंने तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर योजना तैयार की।

    इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन (Instrument of Accession) तैयार किया गया, जिसके तहत रियासतें भारत संघ में शामिल हो सकती थीं।
    उन्हें आंतरिक स्वायत्तता मिलती लेकिन रक्षा, विदेश नीति और संचार केंद्र सरकार के अधीन रहते। अधिकांश रियासतों ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए।

    कठिन रियासतें थीं — हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर

    • जूनागढ़ के नवाब ने पाकिस्तान से जुड़ने का प्रयास किया, लेकिन जनमत संग्रह के बाद भारत में मिला।
    • हैदराबाद के निज़ाम ने स्वतंत्रता चाही, लेकिन 1948 में ऑपरेशन पोलो द्वारा भारतीय सेना ने विलय कराया।
    • कश्मीर ने प्रारंभ में स्वतंत्रता चाही, लेकिन पाकिस्तान के कबायली हमले के बाद महाराजा हरि सिंह ने
      भारत में विलय कर लिया। इसके साथ ही कश्मीर समस्या की शुरुआत हुई।

    6. भारतीय राज्य निर्माण की चुनौतियाँ

    स्वतंत्रता के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी — एक एकीकृत और लोकतांत्रिक राष्ट्र का निर्माण।
    565 रियासतों, विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों, और धार्मिक विविधता के बीच एकता कायम रखना आसान नहीं था।
    विभाजन की त्रासदी और साम्प्रदायिक हिंसा ने स्थिति और भी कठिन बना दी थी।

    • बहुलता का सम्मान: भारत की विविधता को समेटते हुए राष्ट्रीय एकता स्थापित करना।
    • सीमाओं का समेकन: ब्रिटिश प्रांतों और रियासतों को मिलाकर एक सुसंगत राजनीतिक ढाँचा बनाना।
    • संविधान निर्माण: लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित संघीय संविधान तैयार करना।
    • सुरक्षा का प्रश्न: पाकिस्तान से उत्पन्न खतरों और कश्मीर जैसे विवादों का समाधान करना।

    इन चुनौतियों का सामना संविधान सभा ने किया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ भारतीय संविधान इस प्रक्रिया का
    सबसे बड़ा प्रमाण है।

    7. निष्कर्ष

    स्वतंत्रता के बाद भारत का राज्य निर्माण और रियासतों का एकीकरण भारतीय इतिहास की सबसे
    महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। यह केवल प्रशासनिक कदम नहीं था, बल्कि भारतीय राष्ट्रवाद की
    जीत और सभ्यता की पुनर्स्थापना भी थी।

    कैबिनेट मिशन की असफलता, माउंटबेटन योजना के तहत विभाजन, ब्रिटिश प्रांतों का स्वतः भारत में सम्मिलन
    और सरदार पटेल-वी.पी. मेनन के नेतृत्व में रियासतों का विलय
    — इन सभी ने मिलकर आधुनिक भारत की नींव रखी।
    यदि पटेल का नेतृत्व न होता तो शायद भारत आज सैकड़ों टुकड़ों में बँटा होता।
    इस प्रक्रिया ने भारतीय लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला रखी।

    ✔️ क्विक पॉइंट्स

    • कैबिनेट मिशन (1946) ने संघीय ढाँचा सुझाया लेकिन असफल रहा।
    • माउंटबेटन योजना (1947) के अनुसार भारत और पाकिस्तान बने।
    • ब्रिटिश प्रांत स्वतः भारत/पाकिस्तान का हिस्सा बन गए।
    • 565 रियासतों को विलय-पत्र (Instrument of Accession) का विकल्प दिया गया।
    • सरदार पटेल और वी.पी. मेनन ने अधिकांश रियासतों को भारत में मिलाया।

    Bare Text: स्वतंत्रता के बाद भारतीय राज्य निर्माण और रियासतों का एकीकरण भारतीय लोकतंत्र और राष्ट्रवाद की
    सबसे बड़ी उपलब्धि थी। यह प्रक्रिया ही भारत की अखंडता और मजबूती की नींव बनी।

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    📝 अभ्यास हेतु MCQs

    1. कैबिनेट मिशन भारत में कब आया था?
      a) 1942   b) 1945   c) 1946   d) 1947
    2. माउंटबेटन योजना किस वर्ष प्रस्तुत की गई?
      a) जून 1947   b) अगस्त 1946   c) जुलाई 1948   d) जनवरी 1947
    3. इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन से संबंधित कौन-सा कथन सही है?
      a) केवल रक्षा भारत सरकार को सौंपना
      b) रक्षा, विदेश नीति और संचार भारत सरकार को सौंपना
      c) पूर्ण आंतरिक और बाहरी नियंत्रण छोड़ना
      d) केवल न्यायपालिका भारत सरकार को सौंपना
    4. रियासतों के एकीकरण का सबसे बड़ा श्रेय किसे जाता है?
      a) जवाहरलाल नेहरू   b) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद   c) सरदार पटेल   d) महात्मा गांधी
    5. ऑपरेशन पोलो किस रियासत से संबंधित था?
      a) जूनागढ़   b) हैदराबाद   c) कश्मीर   d) भोपाल

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