मैकियावली के धर्म और नैतिकता पर विचार तथा ‘द प्रिंस’ का राज्यदर्शन (Machiavelli on Religion, Morality and The Prince)

विषय सूची (Table of Contents)

  1. 1. धर्म पर विचार (Views on Religion)
  2. 2. नैतिकता और राजनीति का पृथक्करण
  3. 3. ‘द प्रिंस’: राजा के लिए निर्देश
  4. 4. शेर और लोमड़ी की नीति
  5. 5. निष्कर्ष

1. धर्म पर विचार (Thoughts on Religion)

मैकियावली मध्ययुग के पहले ऐसे विचारक थे जिन्होंने धर्म (Religion) को राजनीति के अधीन कर दिया। उनके लिए धर्म कोई ‘आध्यात्मिक सत्य’ नहीं, बल्कि ‘सामाजिक नियंत्रण’ का एक उपकरण (Tool) था।

(A) धर्म का उपयोगितावादी दृष्टिकोण

मैकियावली धर्म विरोधी नहीं थे, लेकिन वे धर्म को राजनीति के लिए उपयोगी मानते थे। उनका कहना था कि एक बुद्धिमान राजा को जनता को नियंत्रित करने और उन्हें कानून का पालन कराने के लिए धर्म का प्रयोग करना चाहिए।

“जहां धर्म के प्रति भय नहीं होता, वहां राज्य का विनाश निश्चित है।”

(B) ईसाई धर्म की आलोचना

मैकियावली ने ईसाई धर्म (Christianity) की आलोचना की क्योंकि यह विनम्रता, त्याग और परलोक पर जोर देता है, जिससे नागरिक कायर और कमजोर बन जाते हैं। इसके विपरीत, उन्होंने प्राचीन रोमन धर्म की प्रशंसा की जो देशभक्ति, युद्ध और बलिदान को बढ़ावा देता था।


2. नैतिकता और राजनीति (Separation of Morality and Politics)

राजनीतिक चिंतन में मैकियावली का सबसे क्रांतिकारी कदम ‘नैतिकता’ की दोहरी परिभाषा (Dual Morality) देना था।

(i) व्यक्तिगत नैतिकता (Private Morality): यह आम नागरिकों के लिए है। उन्हें सच बोलना चाहिए, दया करनी चाहिए और हत्या या चोरी नहीं करनी चाहिए।

(ii) सार्वजनिक/राजनीतिक नैतिकता (Public Morality): यह राजा (Prince) के लिए है। राजा का एकमात्र नैतिक कर्तव्य है—राज्य की सुरक्षा और विस्तार। इस लक्ष्य को पाने के लिए किया गया कोई भी कार्य (चाहे वह हत्या, धोखा या विश्वासघात हो) ‘नैतिक’ माना जाएगा।

साध्य ही साधन का औचित्य है (Ends Justify the Means)

मैकियावली का स्पष्ट मत था कि यदि साध्य (Goal) श्रेष्ठ है—जैसे राज्य की सुरक्षा—तो उसे प्राप्त करने के लिए अपनाए गए साधन (Means) अपने आप पवित्र हो जाते हैं। राजा को परिणाम की चिंता करनी चाहिए, साधन की नहीं।


3. ‘द प्रिंस’: राजा के लिए निर्देश (Ideas on The Prince)

अपनी पुस्तक ‘द प्रिंस’ में मैकियावली ने एक सफल शासक के लिए आचरण संहिता (Code of Conduct) प्रस्तुत की है। उनका उद्देश्य एक ऐसे शक्तिशाली ‘प्रिंस’ का निर्माण करना था जो इटली का एकीकरण कर सके।

प्रमुख विचार और निर्देश:

  • शक्ति का अर्जन: राजा का मुख्य कार्य शक्ति बढ़ाना है। उसे निरंतर युद्ध की तैयारी करनी चाहिए। “शांति काल में भी राजा को युद्ध के बारे में सोचना चाहिए।”
  • प्रेम से बेहतर है भय: राजा के लिए प्रजा का प्रेम सुरक्षित नहीं है, क्योंकि लोग स्वार्थ के लिए प्रेम भूल जाते हैं। लेकिन दंड का भय उन्हें वफादार रखता है। हालांकि, राजा को ‘घृणा’ (Hatred) से बचना चाहिए। उसे प्रजा की महिलाओं और संपत्ति को हाथ नहीं लगाना चाहिए।
  • राष्ट्रीय सेना: मैकियावली ने भाड़े के सैनिकों (Mercenaries) का घोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि भाड़े के सैनिक या तो कायर होते हैं या महत्वाकांक्षी। राजा को अपनी ‘नागरिक सेना’ (National Army) बनानी चाहिए।
  • कानून और बल: राजा को कानून (मनुष्य का तरीका) और बल (जानवर का तरीका), दोनों का प्रयोग करना आना चाहिए।

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4. शेर और लोमड़ी की नीति (Lion and Fox Policy)

मैकियावली का सबसे प्रसिद्ध रूपक (Metaphor) राजा के गुणों से संबंधित है। उनका कहना था कि राजा को जानवरों के गुणों को अपनाना चाहिए।

शेर (Lion) और लोमड़ी (Fox) का सिद्धांत:

“राजा को ‘शेर’ होना चाहिए ताकि वह भेड़ियों (दुश्मनों) को डरा सके, और ‘लोमड़ी’ होना चाहिए ताकि वह जाल (साजिशों) को पहचान सके।”

यदि राजा केवल शेर होगा, तो वह जाल में फंस जाएगा। यदि वह केवल लोमड़ी होगा, तो वह भेड़ियों से अपनी रक्षा नहीं कर पाएगा।

अर्थात: राजा को बलवान और चालाक दोनों होना चाहिए। उसे ऊपर से दयालु और धार्मिक दिखना चाहिए, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर विश्वासघात करने में संकोच नहीं करना चाहिए।

भाग्य (Fortuna) और पौरुष (Virtu)

मैकियावली के अनुसार, राजनीति में 50% भूमिका भाग्य (Fortuna) की होती है और 50% राजा के कर्म/पौरुष (Virtu) की। उन्होंने भाग्य की तुलना एक ‘विनाशकारी नदी’ से की। एक बुद्धिमान राजा (पौरुष) बांध बनाकर उस नदी को नियंत्रित कर सकता है।


5. निष्कर्ष

मैकियावली ने ‘द प्रिंस’ में जिस शासन कला का वर्णन किया, वह नैतिकता की दृष्टि से भले ही निंदनीय लगे, लेकिन व्यावहारिक राजनीति (Realpolitik) की दृष्टि से आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने राजा को सिखाया कि राज्य को कैसे सुरक्षित रखा जाए। मैकियावली के विचार ही आधुनिक कूटनीति का आधार बने।

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