विधान सभा: संरचना, चुनाव प्रक्रिया और शक्तियां (Legislative Assembly: Structure, Election and Powers)

विषय सूची (Table of Contents)

  1. 1. परिचय (Introduction)
  2. 2. विधान सभा की संरचना
  3. 3. सदस्यों की योग्यता एवं कार्यकाल
  4. 4. विधान सभा के कार्य एवं शक्तियां
  5. 5. निष्कर्ष

1. परिचय (Introduction)

राज्य विधानमंडल (State Legislature) के ‘निम्न सदन’ (Lower House) को विधान सभा (Legislative Assembly) कहा जाता है। यह जनता का प्रतिनिधित्व करने वाला सदन है और राज्य की राजनीति में इसका स्थान केंद्रीय स्तर पर लोकसभा के समान ही प्रभावशाली है। संविधान के अनुच्छेद 170 में विधान सभाओं की संरचना का वर्णन किया गया है।


2. विधान सभा की संरचना (Structure/Composition)

विधान सभा के सदस्य प्रत्यक्ष रूप से राज्य की जनता द्वारा चुने जाते हैं। इनकी संख्या राज्य की जनसंख्या पर निर्भर करती है।

(A) सदस्य संख्या (Number of Members)

  • अधिकतम (Maximum): किसी भी राज्य की विधान सभा में सदस्यों की संख्या 500 से अधिक नहीं हो सकती।
  • न्यूनतम (Minimum): सदस्यों की संख्या 60 से कम नहीं होनी चाहिए।
अपवाद (Exceptions): कुछ छोटे राज्यों में सदस्य संख्या 60 से कम है, जिसे विशेष प्रावधानों द्वारा अनुमति दी गई है। जैसे- सिक्किम (32), गोवा (40), और मिजोरम (40)।

(B) आरक्षण (Reservation)

अनुच्छेद 332 के तहत राज्य की जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटें आरक्षित की जाती हैं।


3. सदस्यों की योग्यता एवं कार्यकाल

(A) योग्यताएं (Qualifications) – अनुच्छेद 173

विधान सभा का सदस्य (MLA) बनने के लिए व्यक्ति में निम्नलिखित योग्यताएं होनी चाहिए:

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • उसकी आयु कम से कम 25 वर्ष हो।
  • वह संसद द्वारा निर्धारित अन्य सभी योग्यताएं रखता हो।
  • वह पागल या दिवालिया न हो और लाभ के पद पर न हो।

(B) कार्यकाल (Tenure) – अनुच्छेद 172

विधान सभा का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।

परंतु:

  • मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल इसे समय से पूर्व भी भंग (Dissolve) कर सकता है।
  • राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) के दौरान संसद इसके कार्यकाल को एक बार में एक वर्ष के लिए बढ़ा सकती है।

4. विधान सभा के कार्य एवं शक्तियां

विधान सभा को विधान परिषद (जहाँ मौजूद है) की तुलना में बहुत अधिक शक्तियां प्राप्त हैं:

1. विधायी शक्तियां (Legislative Powers)

विधान सभा राज्य सूची (State List) और समवर्ती सूची (Concurrent List) के विषयों पर कानून बना सकती है। साधारण विधेयक किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है, लेकिन अंतिम शक्ति विधान सभा के पास ही होती है।

2. वित्तीय शक्तियां (Financial Powers)

वित्तीय मामलों में विधान सभा सर्वोच्च है।

  • धन विधेयक (Money Bill): यह केवल विधान सभा में ही पेश किया जा सकता है। विधान परिषद इसे मात्र 14 दिन रोक सकती है।
  • बजट: राज्य के बजट पर नियंत्रण विधान सभा का ही होता है।

3. कार्यपालिका पर नियंत्रण

राज्य की मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधान सभा के प्रति उत्तरदायी होती है (अनुच्छेद 164)। यदि विधान सभा अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) पारित कर दे, तो सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है।

4. निर्वाचन संबंधी शक्तियां

विधान सभा के निर्वाचित सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं। साथ ही, वे राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव भी करते हैं।


5. निष्कर्ष (Conclusion)

संक्षेप में, विधान सभा राज्य की जन-आकांक्षाओं का केंद्र है। यह न केवल कानून बनाती है बल्कि राज्य सरकार पर अंकुश भी रखती है। लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण में विधान सभा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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